इसमें लीज एंड लाइसेंस एग्रीमेंट, किराएदारी के बारे में हाउसिंग को-ऑपरेटिव सोसायटी को जानकारी देने वाला लेटर, इलेक्ट्रिसिटी बिल और वॉटर बिल जैसे सबूत हो सकते हैं।
कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि कर्मचारी के पास इनमें से कोई भी दस्तावेज नहीं होता है। कई जगह देखा जाता है कि वह अपने पिता के घर में रह रहा होता है और रेंट स्लिप लगा देता है। कभी-कभी किराएदार होने पर भी किराए की रकम बढ़ाकर दिखाई जाती है।
ऐसे कई मामले देखे गए हैं, जिनमें कोई व्यक्ति भले ही अलग रह रहा हो, लेकिन वह दावा करता है कि उसी शहर में रहने वाले एक रिश्तेदार को किराया चुका रहा है। कुछ मामलों में परिवार का एक सदस्य लोन पेमेंट डिडक्शन का क्लेम करता है तो दूसरा टैक्स से बचने के लिए फर्जी रेंट रसीद चिपका देता है। इसे देखते हुए सख्त रिपोर्टिंग सिस्टम बनाए जाने पर विचार किया जा रहा है ।

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